वैश्विक पटल पर नगीना की काष्ठ कला को जीवंत रखने वाले मोहम्मद मतलूब
उत्तर प्रदेश के जनपद बिजनौर में स्थित ऐतिहासिक कस्बा नगीना अपनी सदियों पुरानी काष्ठ कला (Wood Carving) के लिए विश्व विख्यात है। लकड़ी पर महीन नक्काशी और जाली कार्य की इस धरोहर को जीवित रखने, सहेजने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने में यहाँ के उस्ताद कारीगरों का अतुलनीय योगदान रहा है। ऐसे ही शीर्ष शिल्पकारों में एक प्रतिष्ठित नाम है—श्री मोहम्मद मतलूब।
मोहल्ला लोहारी सराय निवासी श्री मोहम्मद मतलूब (पुत्र स्वर्गीय मोहम्मद अयूब) एक ऐसे निपुण और सम्मानित शिल्पकार हैं, जिन्होंने अपनी जादुई उंगलियों के हुनर से नगीना की लगभग 500 वर्ष पुरानी काष्ठ कला परंपरा को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया है।
राष्ट्रीय एवं सर्वोच्च शिल्प सम्मानों से विभूषित
श्री मोहम्मद मतलूब की असाधारण प्रतिभा और कला के प्रति उनके समर्पण को राज्य एवं भारत सरकार द्वारा विभिन्न अवसरों पर सम्मानित किया जा चुका है। हस्तशिल्प के क्षेत्र में देश का गौरव बढ़ाने के लिए उन्हें भारत सरकार द्वारा निम्नलिखित शीर्ष पुरस्कारों से सुशोभित किया गया है:
- शिल्पगुरु पुरस्कार (Shilp Guru Award) – भारत में हस्तशिल्प क्षेत्र का सर्वोच्च सम्मान।
- राष्ट्रीय पुरस्कार (National Award)
- राष्ट्रीय योग्यता प्रमाण पत्र (National Merit Award)
ये पुरस्कार इस बात का प्रमाण हैं कि मतलूब जी केवल एक कारीगर नहीं, बल्कि भारतीय काष्ठ कला के जीवित स्तंभ हैं।
नए संसद भवन की आर्ट गैलरी में नगीना का गौरव
भारत के आधुनिक गौरव के प्रतीक 'नए संसद भवन' (New Parliament House) की आर्ट गैलरी को सुसज्जित करने का ऐतिहासिक अवसर श्री मोहम्मद मतलूब जी को प्राप्त हुआ। उनके कर-कमलों द्वारा लकड़ी पर तैयार किया गया अत्यंत बारीक और उत्कृष्ट आर्ट वर्क आज संसद भवन की शोभा बढ़ा रहा है। यह कलाकृति रहती दुनिया तक नगीना की काष्ठ कला के साथ-साथ मतलूब जी के नाम और उनकी कलात्मक विरासत को अमर रखेगी।
नगीना की कला को मिला भौगोलिक संकेतक (GI Tag)
नगीना के विशिष्ट वुड कार्विंग और जाली कार्य को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक कानूनी पहचान देने तथा इसे पायरेसी से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा जी.आई. टैग (Geographical Indication - GI Tag) प्रदान किया गया है। नगीना क्राफ्ट्स को यह वैश्विक विशिष्टता (GI Certificate) दिलाने के पीछे मतलूब जी का अथक संघर्ष और महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
नई पीढ़ी को कला का हस्तांतरण एवं सामाजिक योगदान
जब मशीनीकरण के दौर में यह पारंपरिक कला मृतप्राय होने की कगार पर थी, तब मतलूब जी ने इसे संजीवनी देने का काम किया:
- ज्ञान का हस्तांतरण: कला की तकनीकी बारीकियों और 'फन्नी' (पारंपरिक औजार व तकनीक) के हुनर को उन्होंने नई पीढ़ी के युवाओं को सिखाया, ताकि यह सांस्कृतिक विरासत कभी लुप्त न हो।
- संस्थागत नेतृत्व: 'नगीना क्राफ्ट्स डेवलपमेंट सोसाइटी' के सदस्य के रूप में उन्होंने स्थानीय कारीगरों को संगठित किया और उनके अधिकारों व कला के उत्थान के लिए निरंतर संघर्ष किया।
श्री मोहम्मद मतलूब जी का जीवन और उनकी कला यात्रा नगीना के हर नागरिक के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने न केवल अपने पुश्तैनी हुनर को जीवित रखा, बल्कि उसे देश के लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर (संसद भवन) तक पहुँचाया। नगीना के इस अनमोल रत्न की कला साधना, उनके अविस्मरणीय योगदान और अटूट संघर्ष को सादर नमन करता है।
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